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Showing posts from January, 2022

वेस्टइंडीज की क्रिकेट टीम कोई राष्ट्रगान क्यों नहीं गाती है?

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भारत और वेस्टइंडीज अब तक एक दूसरे से साथ 14, टी-20 मैच खेल चुके हैं जिसमें से 8 भारत ने जीते हैं और 5 वेस्टइंडीज ने जीते हैं. वेस्टइंडीज की पूरी टीम ने 116 टी-20 मैच हैं जिनमें से उसने 50 जीते हैं और 59 में हार का सामना करना पड़ा है. वेस्टइंडीज कोई एक राष्ट्र नहीं है है बल्कि कई प्रान्तों से मिलकर बना एक राष्ट्रों का संघ है जिसमें कई देश आज भी ब्रिटेन की राजशाही की मदद से चलाये जा रहे हैं. एक समय था जब वेस्टइंडीज की टीम पूरी दुनिया में सबसे मजबूत मानी जाती थी. इस टीम ने शुरूआती दोनों विश्व कप जीते थे लेकिन तीसरे विश्व कप-1983 में उसे भारत के हाथों हार मिली थी. हाल में समाप्त हुए विश्व कप में आपने देखा होगा कि मैच शुरू होने से पहले हर देश का राष्ट्रगान बजाय जाता है. लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि वेस्ट इंडीज टीम का कोई राष्ट्रगान नहीं है. आइये जानते हैं कि वेस्ट इंडीज की टीम का कोई राष्ट्रगान क्यों नहीं है और टीम मैच शुरू होने से पहले कौन सा गीत गाती है? वेस्टइंडीज़ किसी एक देश का नाम नहीं नहीं है बल्कि यह कई छोटे छोटे प्रान्तों से मिलकर बना है. इसीलिए इसे अंग्...

किसी नए देश को किस प्रकार बनाया जाता है?

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खुद को भगवान बताने वाले नित्यानंद नाम के एक शख्स ने दावा किया है कि उसने ‘कैलास’ नाम का एक हिन्दू राष्ट्र बना लिया है. अब लोगों के दिमाग में यह प्रश्न उठा रहा है कि भला कोई व्यक्ति या क्षेत्र कैसे अपना अलग देश बना सकता है?आइये इस लेख में जानते हैं. मीडिया में ऐसी ख़बरें आ रहीं हैं कि खुद को भगवान बताने वाले नित्यानंद ने कहा है कि उसने अपना देश बना लिया है, जिसका एक राष्ट्रीय झंडा है, राष्ट्रीय पशु है, एक डिपार्टमेंट ऑफ़ कॉमर्स, डिपार्टमेंट ऑफ़ मानव संसाधन और डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड एंड सिक्यूरिटी भी  है. ख़बरों में ऐसा कहा गया है कि उसने अपना देश (जिसका नाम ‘कैलास’है) इक्वेडोर के पास आइलैंड खरीदकर बनाया है. कुछ लोग मानते हैं कि उसने ‘कैलाश’ नाम का देश त्रिनिदाद और टोबैगो के पास बनाया है. फ़िलहाल मुद्दे की बात यह है कि किसी देश का निर्माण कैसे किया जाता है, इसके लिए किन-किन दस्तावेजों और औपचारिकताओं की जरूरत होती है? आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं. कोई नया देश क्यों बनता? अक्सर हर देश में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो कि वर्तमान शासन व्यवस्था या वर्तमान सरक...

पश्चिमी अफ्रीका के देशों ने नयी करेंसी "इको" को क्यों शुरू किया है?

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   पश्चिमी अफ्रीका के 8 देशों; माली, नाइजर, सेनेगल, बेनिन,टोगो, बुर्किना फासो, गिनी-बसाउ, और आइवरी कोस्ट ने सीएफए फ्रैंक की जगह नई मुद्रा इको को चलाने का फैसला किया है. आइये इस लेख में जानते हैं कि यह निर्णय क्यों लिया गया है?     कहते हैं कि बिना "अर्थ" के कोई तंत्र' नहीं होता है. इसी प्रकार बिना करेंसी को कोई देश भी नहीं होता है. किसी देश की करेंसी उस देश की पहचान होती है.     इसी पहचान को बनाने के लिए पश्चिमी अफ्रीका के 8 देशों; माली, नाइजर, सेनेगल, बेनिन,टोगो, बुर्किना फासो, गिनी-बसाउ, और आइवरी कोस्ट ने फ्रांसीसी उपनिवेश काल से चली आ रही गुलामी को ख़त्म करते हुए फैसला किया है कि वे वर्तमान में प्रचलित मुद्रा ‘सीएफए फ्रैंक’ की जगह अपने देश में एक नई मुद्रा "इको" का इस्तेमाल करेंगे. इकोवास (ECOWAS) क्या है? अफ्रीका महाद्वीप को आर्थिक पिछड़ेपन के कारण ‘काला महाद्वीप’ कहा जाता है लेकिन अब यह महाद्वीप अपने नाम को बदलने की राह पर चल पड़ा है. इसी दिशा में कदम उठाते हुए पश्चिम अफ्रीका के 15 देशों ने लागोस की संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद पश्चिम अफ्रीकी राज्यों का ...

शीत युद्ध का इतिहास, प्रमुख कारण, प्रभाव, एवं अंत

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शीतयुद्ध किसे कहते है? शीत युद्ध जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है कि यह अस्त्र-शस्त्रों का युद्ध न होकर धमकियों तक ही सीमित युद्ध है। इस युद्ध में कोई वास्तविक युद्ध नहीं लड़ा गया। शीत युद्ध एक प्रकार का वाक युद्ध  ( वाक युद्ध (war of words) अर्थात वह युद्ध जिसमें हथियार के स्थान पर बोली,वचन का प्रयोग हो,लोग अपनी बातों से दूसरे को हराने का प्रयास करें।) था जो कागज के गोलों, पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो तथा प्रचार साधनों तक ही लड़ा गया। इस युद्ध में न तो कोई गोली चली और न कोई घायल हुआ। इसमें दोनों महाशक्तियों ने अपना सर्वस्व कायम रखने के लिए विश्व के अधिकांश हिस्सों में परोक्ष युद्ध (indirect war) लड़े। युद्ध को शस्त्र युद्ध (arms war) में बदलने से रोकने के सभी उपायों का भी प्रयोग किया गया। यह केवल कूटनीतिक उपयों द्वारा लगा जाने वाला युद्ध था जिसमें दोनों महाशक्तियां एक दूसरे को नीचा दिखाने के सभी उपायों का सहारा लेती रही। इस शीत   युद्ध का उद्देश्य अपने-अपने गुटों में मित्रा राष्ट्रों को शामिल करके अपनी स्थिति मजबूत बनाना था ताकि भविष्य में प्रत्येक अपने अपने विरोध...

इतिहास का वो अनोखा युद्ध, एक बाल्टी के लिए आपस में भिड़ गए थे दो राज्यों के सैनिक

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 दुनियाभर में एक से बढ़कर एक खतरनाक युद्ध हुए, जिसमें हजारों-लाखों लोगों की जान चली गई। वैसे अधिकांश युद्ध के पीछे सिर्फ एक ही मकसद होता था, उस राज्य पर कब्जा कर अपनी सत्ता का विस्तार करना। लेकिन आज से करीब सैकड़ों साल पहले एक ऐसा युद्ध लड़ा गया था, जिसके पीछे की वजह केवल एक बाल्टी थी। आपको ये बात थोड़ी अजीब जरूर लग रही होगी, लेकिन ये सच है। दरअसल, यह घटना 1325 ईस्वी की है, उस समय इटली में धार्मिक तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया था। यहां के दो राज्यों बोलोग्ना और मोडेना के बीच अक्सर लड़ाईयां होती रहती थी। क्योंकि बोलोग्ना को ईसाई धर्मगुरु पोप का समर्थन मिला हुआ था, जबकि मोडेना को रोमन सम्राट का समर्थन प्राप्त था। असल में बोलोग्ना के लोगों का मानना था कि पोप ही ईसाई धर्म के सच्चे गुरु हैं, जबकि मोडेना के लोग मानते थे कि रोमन सम्राट ही असली गुरु हैं। बोलोग्ना और मोडेना के बीच 1296 ईस्वी में एक लड़ाई पहले ही हो चुकी थी। इसके बाद से दोनों राज्यों के बीच हमेशा तनाव बना रहता था। इतिहासकारों के मुताबिक, रिनाल्डो बोनाकोल्सी के शासनकाल में मोडेना काफी ज्यादा आक्रामक हो गया था और अक्सर...

जब अकेला अरब देशों पर भारी पड़ा था इजरायल, 6 दिन में बदल गया था मिडिल ईस्ट का नक्शा

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   इजरायल और फिलिस्तीनियों के बीच खूनी संघर्ष शुरू होने से फिर जंग की आशंका जताई जाने लगी है. इस टकराव से दुनिया के शक्तिशाली देश चिंतित हैं. मौजूदा हालात को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र मध्य पूर्व के दूत टोर वेन्स्लैंड ने आगाह किया है कि हम पूरी तरह से युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फिलिस्तीनियों के चरमपंथी गुट हमास को चेतावनी दी है कि उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाएगी कि वे सपने में भी इजरायल पर हमला करने के बारे में नहीं सोचेंगे. इजरायल के राष्ट्रपति रियूवेन रिवलिन ने लोगों से सशस्त्र तरीके से चौकस रहने का आह्वान किया है. इजरायली सेना का दावा है कि सोमवार 10 मई से अब तक हमास ने एक हजार से ज्यादा रॉकेट हमले किए हैं. दुनिया के मुस्लिम मुल्क फिलिस्तीनियों के पक्ष में खड़े हैं और इजरायल के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग कर रहे हैं. मगर, सवाल है कि अगर इजरायल से युद्ध छिड़ता है तो क्या अरब वर्ल्ड उसका मजबूती से मुकाबला कर पाएगा. अतीत में इजरायल अरब दुनिया को जंग में मात दे चुका है. इजरायल और अरब देशों के बीच 1967 में हुए युद्ध ने...

आखिर भारत और चीन में क्यों हुआ था 1962 का युद्ध

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  1947 में भारत का एक बार फिर विभाजन हुआ। भारत से अलग हुए क्षेत्र को पश्‍चिमी पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) कहा जाता था। विभाजन के बाद पाकिस्तान की नजर थी कश्मीर पर। उसने कश्मीरियों को भड़काना शुरू किया और अंतत: कश्मीर पर हमला कर दिया। 26 अक्टूबर को 1947 को जम्मू और कश्मीर के तत्कालीन शासक महाराजा हरिसिंह ने अपनी रियासत के भारत में विलय के लिए विलय-पत्र पर दस्तखत किए थे। इस वैधानिक दस्तावेज पर दस्तखत होते ही समूचा जम्मू और कश्मीर, जिसमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला इलाका भी शामिल है, भारत का अभिन्न अंग बन गया था। लेकिन परिस्थिति का लाभ उठाते हुए 22 अक्टूबर 1947 को कबाइली लुटेरों के भेष में पाकिस्तानी सेना को कश्मीर में भेज दिया। वर्तमान के पा‍क अधिकृत कश्मीर में खून की नदियां बहा दी गईं। भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ाते हुए उनके द्वारा कब्जा किए गए कश्मीरी क्षेत्र को पुनः प्राप्त करते हुए तेजी से आगे बढ़ रही थी कि बीच में ही 31 दिसंबर 1947 को नेहरूजी ने यूएनओ से अपील की कि ...

हिटलर ने शादी की, पार्टी की फिर गोली मार ली

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25 अप्रैल, 1945 के बाद से हिटलर के जीवन का सिर्फ़ एक ही मक़सद था - स्वयं अपनी मौत की तैयारी करना. 25 अप्रैल को ही उसने अपने निजी अंगरक्षक हींज़ लिंगे को बुला कर कहा था, "जैसे ही मैं अपनेआप को गोली मारूँ तो तुम मेरे मृत शरीर को चांसलरी के बगीचे में ले जा कर उसमें आग लगा देना. मेरी मौत के बाद कोई मुझे देखे नहीं और न ही पहचान नहीं पाए. इसके बाद तुम मेरे कमरे में वापस जाना और मेरी वर्दी, कागज़ और हर चीज़ जिसे मैंने इस्तेमाल किया है,जमा करना और बाहर आकर उसमें आग लगा देना. सिर्फ़ अंटन ग्राफ़ के बनाए गए फ़्रेडरिक महान के तैल चित्र को तुम्हें नहीं छूना है जिसे मेरा ड्राइवर मेरी मौत के बाद सुरक्षित बर्लिन से बाहर ले जाएगा." अपने जीवन के आख़िरी दिनों में हिटलर ज़मीन से 50 फ़िट नीचे बनाए बंकर में ही काम करते और सोते. सिर्फ़ अपनी चहेती कुतिया ब्लांडी को कसरत कराने के लिए वो कभी कभी चांसलरी के बगीचे में जाते, जहाँ चारों तरफ़ बमों से ध्वस्त टूटी हुई इमारतों के मलबे पड़े होते. कौन कौन थे हिटलर के पास? हिटलर सुबह पाँच या छह बजे सोने जाते थे और दोपहर के आसपास सो कर उठते थे. हि...

हिटलर और एक नाबालिग यहूदी लड़की की दोस्ती की दास्तान

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  पहली नज़र में एक बच्ची को गले लगाते इस व्यक्ति की ये तस्वीर बहुत प्यारी लगती है. लेकिन 1933 में ली गई इस तस्वीर के पीछे की कहानी थोड़ी पेचीदा है. तस्वीर में दिख रहे लोग हैं, जर्मन नेता और 60 लाख यहूदियों की मौत के ज़िम्मेदार अडॉल्फ हिटलर और यहूदी मूल की एक लड़की रोज़ा बर्नाइल निनाओ. वरिष्ठ नाज़ी अधिकारियों के हस्तक्षेप तक हिटलर ने इस लड़की से कई साल तक दोस्ती बनाए रखी, लेकिन बाद में सब ख़त्म हो गया. मैरीलैंड स्थित एलेक्ज़ेंडर हिस्टॉरिकल ऑक्शन एज़ेंसी के अनुसार, हैनरिक़ हॉफ़मैन ने इस तस्वीर को लिया था. इस तस्वीर की बीते मंगलवार को अमरीका में 11,520 डॉलर यानी क़रीब 8.2 लाख रुपये में नीलामी की गई. नीलामी करने वाले बिल पैनागोपुलस ने ब्रिटिश समाचार पत्र डेली मेल से कहा, ''इस हस्ताक्षरित तस्वीर को पहले कभी किसी ने नहीं देखा.'' इस तस्वीर की ख़ास बात ये है कि इस तस्वीर में बच्ची और हिटलर के बीच का रिश्ता वास्तविक लग रहा है. बिल कहते हैं, ''हिटलर अक्सर बच्चों के साथ प्रचार के मक़सद से ही फोटो खिंचवाते थे. ''   हिटलर का प्यार 20 अप्रैल को अपने जन्मदिन पर...

हिटलर की वो ग़लतियाँ, जिनसे दूसरे विश्व युद्ध की धारा बदल गई

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22 जून 1941 को नाज़ी जर्मनी ने ऑपरेशन बारबरोसा शुरू किया था, जो सोवियत संघ के ख़िलाफ़ एक बड़ी आक्रामक कार्रवाई थी. उस समय सोवियत संघ की कमान स्टालिन के हाथों में थी. ये इतिहास का सबसे बड़ा सैनिक आक्रमण था. ये एक जोख़िम भरा दाँव भी था, जो उस समय एडोल्फ़ हिटलर ने दूसरे विश्व युद्ध को निर्णायक रूप से अपने पक्ष में करने की कोशिश में खेला था. लेकिन चीज़ें वैसी नहीं हुईं, जैसी जर्मनी के नेता हिटलर चाहते थे. इतिहासकार इस ऑपरेशन की नाकामी को दूसरे विश्व युद्ध का एक टर्निंग प्वाइंट और इसे जर्मन श्रेष्ठता के अंत की शुरुआत भी मानते हैं. ऑपरेशन बारबरोसा ने दो अधिनायकवादी महाशक्तियों के बीच छह महीने तक चली भीषण जंग शुरू की. ये एक ऐसी प्रतियोगिता थी, जो दूसरे विश्व युद्ध का निर्णायक नतीजा लाने वाली थी. ऑपरेशन बारबरोसा का नाम 12वीं शताब्दी के पवित्र रोमन सम्राट फ़्रेडरिक बारबरोसा के नाम पर शुरू किया गया था. सोवियत संघ पर जर्मनी के आक्रमण के साथ ही वर्ष 1939 में हुआ जर्मन-सोवियत समझौता भी टूट गया. धुरी देशों की सेनाओं ने 30 लाख लोगों को तीन ग्रुपों में बाँट कर लेनिनग्राद, कीएफ़ और मॉस्क...

प्रथम विश्वयुद्ध से जुड़े रोचक तथ्‍य और जानकारियां

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1914 से 1919 के मध्य यूरोप, एशिया और अफ्रीका तीन महाद्वीपों के जल, थल और आकाश में प्रथम विश्‍व युद्ध लड़ा गया. इसमें भाग लेने वाले देशों की संख्या, इसका क्षेत्र और इससे हुई क्षति के अभूतपूर्व आंकड़ों के कारण ही इसे विश्वयुद्ध कहते हैं. प्रथम विश्वयुद्ध लगभग 52 महीने तक चला और उस समय की पीढ़ी के लिए यह जीवन की दृष्टि बदल देने वाला अनुभव था. करीब आधी दुनिया हिंसा की चपेट में चली गई और इस दौरान अनुमानतः एक करोड़ लोगों की जान गई और इससे दोगुने घायल हो गए. इसके अलावा बीमारियों और कुपोषण जैसी घटनाओं से भी लाखों लोग मरे. विश्व युद्ध खत्म होते-होते चार बड़े साम्राज्य रूस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी और उस्मानिया ढह गए. यूरोप की सीमाएं फिर से निर्धारित हुईं और अमेरिका निश्चित तौर पर एक 'सुपर पावर' बन कर उभरा. प्रथम विश्‍व युद्ध से जुड़े तथ्‍य इस प्रकार हैं: (1) प्रथम विश्वयुद्ध की शुरुआत 28 जुलाई 1914 ई. में हुई. (2) प्रथम विश्वयुद्ध 4 वर्ष तक चला. (3) 37 देशों ने प्रथम विश्‍वयुद्ध में भाग लिया. (4) प्रथम विश्वयुद्ध का तात्का‍लिक कारण ऑस्ट्रिया के राजकुमार फर्डिंनेंड की हत...

प्रथम विश्व युद्ध के कारण एवं परिणाम - First World War

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प्रथम विश्व युद्ध के कारण एवं परिणाम : प्रथम विश्व युद्ध 28 जुलाई, 1914 से 11 नवंबर 1918 तक चलने वाला विश्वव्यापी युद्ध था। इस युद्ध को ‘ ग्लोबल वॉर व  ग्रेट वॉर’ भी कहा जाता है। प्रथम विश्व युद्ध में मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र दो खेमों में बंट गए थे। जिसमें मित्र राष्ट्रों का नेतृत्व इंग्लैंड, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस तथा फ़्रांस जैसे अन्य देशों द्वारा किया गया था तथा धुरी राष्ट्रों का नेतृत्व जर्मनी, ऑस्ट्रिया हंगरी और इटली जैसे देशों ने किया था। 4 वर्षों तक चलने वाले इस विश्व युद्ध में 36 देशों के लगभग 6.5 करोड़ लोगों ने हिस्सा लिया था जिसमें मित्र राष्ट्र के 60 लाख व धुरी राष्ट्र के 40 लाख सैनिकों की मृत्यु हो गई थी। प्रथम विश्व युद्ध दुनिया की सबसे विनाशकारी एवं भयानक घटनाओं में से एक थी जिसमें निर्दोष नागरिकों और बहुत से लोगों को अपना जीवन त्यागना पड़ा था। ऐसा माना जाता था की प्रथम विश्व युद्ध सभी युद्धों का अंत कर देगा परन्तु ऐसा नहीं हुआ इसके बाद भी द्वितीय विश्व युद्ध हुआ। मशीन गन, टैंक्स, पानी के अंदर चलने वाले यानों का सबसे पहले उपयोग इसी युद्ध में...